भारतीय संस्कृति क्या है? कलियुग में विशेषतापूर्ण तथा साधकों से सभी अंगों से बनानेवाली सनातन संस्था की एकमात्रद्वितीय गुरु-शिष्य परंपरा ! July 13, 2019 Share this on : Twitter Facebook Google + Whatsapp गुरु-शिष्य परंपरा भारत की विशेषता है । इस परंपरा के कारण ही हिन्दू धर्म अनेक विदेशी आघातों में भी समर्थरूप से टिका हुआ है । सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉक्टरजी ने इस परंपरा को विशेषरूप से संजोया है । ‘गुरु अपने शिष्य को विविध प्रसंगों के माध्यम से अथवा अनुभितियों के माध्यम से सिखाते हैं, साथ ही वे केवल अपने अस्तित्व के कारण भी शिष्य की उन्नति करवा लेते हैं, इसकी प्रचीती हमें सनातन संस्था में देखने के लिए मिलती है । परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने सनातन संस्था के साधकों को सभी अंगों से बनाया है । उसके कारण ही आज १०० से भी अधिक साधक संत बन चुके हैं । निम्नांकित लेख से हम ‘सनातन के संत गुरु की भांति ही साधकों को कैसे बनाते हैं ?,’ इसका विवेचन देखेंगे । साधकों को व्यष्टि एवं समष्टि स्तरपर मार्गदर्शन करनेवाली सनातन की गुरु-शिष्य प...